अजमेर : भारतीय उपमहाद्वीप को प्राचीन काल से ही 'जंबूद्वीप' कहा जाता है. इस नाम के पीछे का सबसे बड़ा कारण यह है कि प्राचीन समय में यहां जामुन के पेड़ों की भारी भरमार थी. माना जाता है कि जामुन की उत्पत्ति मूल रूप से भारत की धरती से ही हुई है. यह फल इंसानों के लिए प्रकृति का एक ऐसा अनोखा वरदान है, जो न सिर्फ जुबान को खट्टा-मीठा स्वाद देता है बल्कि शरीर को सैकड़ों बीमारियों से भी दूर रखता है.

​वैसे तो देश के कई हिस्सों में जामुन होता है, लेकिन राजस्थान के प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक तीर्थ स्थल पुष्कर की बात ही कुछ अलग है. यहां की मिट्टी और जलवायु बागवानी के लिए इतनी उत्तम है कि यहां आंवले, गुलाब, शहतूत, फलसे, गोंदे और बिजौरा नींबू की खेती बड़े पैमाने पर होती है. लेकिन इन दिनों पुष्कर में जिस फल की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह है पुष्कर का जामुन. स्वाद और औषधीय गुणों से भरपूर यहां का जामुन उत्तर भारत के तमाम राज्यों से लेकर देश की आर्थिक राजधानी मुंबई तक के लोगों की पहली पसंद बन चुका है.

​पुष्कर के 'काले मोती' का देशव्यापी जलवा (वीडियो ईटीवी भारत पुष्कर)

इसे भी पढ़ें: देश की नामी कंपनियां पुष्कर से खरीदती हैं आंवला, कई राज्यों में जाते हैं Products

जामुन शुद्ध रूप से भारतीय फल है. वर्ष में डेढ़ माह ही नजर आने वाला जामुन अपने भीतर विभिन्न औषधीय गुण छुपाए हुए हैं. जामुन के पल्प में ही नहीं बल्कि इसकी गुठली में भी विभिन्न बीमारियों से लड़ने की शक्ति है. पुष्कर क्षेत्र में जामुन की खेती बड़े पैमाने पर होती है. जामुन की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा है, लेकिन यह अच्छी पैदावार पर निर्भर करता है. मौसम की अनुकूलता और रोग नहीं लगने पर जामुन किसानों को निहाल बना रहा है. स्वास्थ्य के प्रति जब से लोगों में जागरूकता बढी है तब से जामुन के सीजन में किसकी डिमांड और कीमत भी काफी बढ़ गई है. 30 से 40 रूपए प्रति किलो बिकने वाला जामुन आज 200 से ढाई सौ रुपए किलो बाजार में बिक रहा है, जबकि किसानों से जामुन 80 से 100 रुपए प्रतिकिलो लिया जाता है.

गुणों की खान है पुष्कर के काले जामुन

गुणों की खान है पुष्कर के काले जामुन (फोटो ईटीवी भारत gfx)

​देसी से लेकर ग्राफ्टेड तक, जामुन की 4 बेहतरीन वैरायटी : ​पुष्कर के वरिष्ठ किसान नेता ताराचंद गहलोत बताते हैं कि इन दिनों जामुन का सीजन अपने चरम पर है. बाजार में अब यह फल मुश्किल से 15 से 20 दिन और दिखाई देगा. सवा महीने के इस छोटे से सीजन में पुष्कर की कृषि उपज मंडी में रोजाना 15,000 से 25,000 किलो जामुन पहुंच रहा है. यहां से थोक व्यापारी जामुन को खरीदकर जयपुर, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा की मुख्य मंडियों में भेजते हैं, जहां से इसे उत्तर भारत के अन्य राज्यों और मुंबई की बाजारों में सप्लाई किया जाता है.

गहलोत ने बताया कि 40 बरस पहले तक पुष्कर में जामुन की दो ही वेराइटी हुआ करती थी. इनमें देसी जामुन और सिल्ली थी. लेकिन अब चार प्रकार की वैरायटी के जामुन की पैदावार होती है, जिसमें खजुरी और ग्राफ्टेड खजूर भी शामिल है. उन्होंने बताया कि ग्राफ्टेड जामुन के पौधे को फल देने मे 3 वर्ष का समय लगता है, जबकि जामुन के अन्य वैरायटी के पौधों को दस साल बाद फल की पैदावार देने लगते है.

जामुन के औषधीय गुण

जामुन के औषधीय गुण (फोटो ईटीवी भारत पुष्कर)

इसे भी पढ़ें: Exclusive Report: मरुधरा में 18 साल पुरानी जैतून फार्मिंग पर संकट, स्पेन के वैज्ञानिक देंगे 'संजीवनी'

खास बात यह कि ग्राफ्टेड के अलावा अन्य वैरायटी के जामुन के पेड़ 100 साल तक फल देते हैं. अभी भी कई किसान देसी जामुन की खेती करते है. देसी, सिल्ली या खजुरी जामुन के पेड़ की हाइट 100 फिट तक जाती है. इतनी ऊंची हाइट से जामुन तोड़ने का रिस्क रहता है. वर्षों पहले तो लकड़ी का झूला बनाकर नीचे एक व्यक्ति उस रस्सी को पकड़ कर रखता था. झूले पर बैठा आदमी जामुन तोड़ता था, लेकिन अब सीढ़ियों से जमुना चढ़कर तोड़े जाते हैं जो काफी रिस्की होता है.

औषधि गुणों से भरपूर है जामुन : गहलोत बताते हैं की औषधि गुण जामुन और इसकी गुठली दोनों में होते हैं. जामुन को मधुमेह का रोगी भी खा सकता है. जामुन की गुठली को तोड़ कर उसमें से हरा बीज निकाला जाता है, उसको सुखाकर पाउडर बनाया जाता है. जामुन की गुठली का पाउडर शुगर के रोगियों के लिए रामबाण दवा है. उन्होंने बताया कि जामुन की लकड़ी का प्रयोग यज्ञ के लिए तो होता ही है. पुराने समय से ही लोग घरों के पानी के हौद, कुएं या पानी की टंकियों में जामुन की लकड़ी का एक टुकड़ा डाल देते हैं. ऐसा करने से पानी में कभी भी काई (Algae) नहीं जमती और पानी लंबे समय तक शुद्ध बना रहता है. पुष्कर में देवनगर, गनाहेड़ा, बांसेली, तिलोरा, मोतीसर, भगवानपुर आदि गांवों में बड़े पैमाने पर जामुन की खेती की जाती है.

पुष्कर का जामुन किसानों को बना रहा है मालामाल

पुष्कर का जामुन किसानों को बना रहा है मालामाल (फोटो ईटीवी भारत पुष्कर)

​जामुन तोड़ने का जानलेवा जोखिम : ​जामुन की खेती जितनी मुनाफेदार है, इसके फल को पेड़ से सुरक्षित उतारना उतना ही मुश्किल और जोखिम भरा काम है. देसी, सिल्ली और खजुरी जामुन के पेड़ों की ऊंचाई 100 फीट तक चली जाती है. इतनी ऊंचाई से जामुन तोड़ना कोई बच्चों का खेल नहीं है. ​किसान रितेश गहलोत बताते हैं कि पुराने जमाने में जामुन तोड़ने के लिए लकड़ी का एक झूला बनाया जाता था. एक व्यक्ति झूले पर बैठकर ऊपर डालियों से जामुन तोड़ता था और नीचे खड़ा दूसरा व्यक्ति रस्सी के सहारे उस झूले को नियंत्रित करता था. लेकिन आज के समय में लंबी-लंबी सीढ़ियों के सहारे पेड़ पर चढ़ा जाता है. जामुन के पेड़ का तना भले ही कितना भी मोटा क्यों न हो, लेकिन उसकी शाखाएं बेहद कमजोर और लचीली होती हैं, जिन पर पैर रखते ही टूटने का डर रहता है.

इसे भी पढ़ें: सीकर की ‘कैरेट लेडी’ का कमाल, गाजर के बीज उत्पादन से कमा रहीं सालाना 35 लाख, राष्ट्रपति भी कर चुके हैं सम्मानित

एक स्वस्थ पेड़ से साढ़े चार सौ से 500 किलो की पैदावार : गहलोत ने बताया कि पुष्कर से जयपुर, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में जामुन जाता है और यहां से उत्तर भारत ही नहीं बल्कि मुंबई तक पुष्कर के जामुन पहुंच रहे हैं. उन्होंने बताया कि बड़ा पेड़ जामुन का होता है उसमें 450 से 500 किलो जामुन एक सीजन में उतर जाते हैं. यह पूरी तरह से मौसम के मिजाज पर निर्भर करता है. यदि फूल आने के समय तेज आंधी या बेमौसम बारिश हो जाए, तो फसल को भारी नुकसान पहुंचता है. इसके अलावा, जामुन को कीटों और विभिन्न रोगों से बचाने के लिए किसानों को साल में कम से कम दो बार कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करना पड़ता है. अगर सही समय पर दवाओं का छिड़काव न किया जाए, तो जामुन में कीड़े लग जाते हैं और पूरी फसल बर्बाद हो जाती है. पुष्कर के देवनगर, गनाहेड़ा, बांसेली, तिलोरा, मोतीसर और भगवानपुर जैसे गांवों में आज घर-घर में जामुन के बाग देखे जा सकते हैं.

आसान नहीं जामुन की तुड़वाई करवाना : किसान रितेश गहलोत ने बताया कि जामुन को पेड़ों से तुड़वाना किसानों के लिए काफी महंगा पड़ता है. पहले मौसम की अनुकूलता, पेड़ का स्वास्थ्य, खाद, दवा और पानी आदि मिलने के बाद पेड़ पर जामुन आने लगते हैं. पहले हरे रंग के जामुन आते हैं फिर उनमें रंग बदलने लगता है. उसके बाद जामुन का पल्प बनता है. जामुन की यह प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उन्हें तुड़वाकर मंडी ले जाया जाता है और मंडी से यह बाजारों में पहुंचता है.

जामुन की गुठली फायदेमंद

जामुन की गुठली फायदेमंद (फोटो ईटीवी भारत पुष्कर)

यही कारण है कि जामुन तोड़ने के लिए विशेष रूप से कुशल श्रमिकों (मजदूरों) की जरूरत होती है. इस काम के लिए केवल वही लोग उपयुक्त माने जाते हैं जिनका वजन कम हो, शरीर फुर्तीला हो और जो ऊंचाई पर संतुलन बना सकें. आज के समय में ऐसे कुशल मजदूर मिलना बेहद मुश्किल हो गया है. जामुन तोड़ने वाला एक मजदूर प्रतिदिन का 1200 रुपये तक मेहनताना (मजदूरी) लेता है. किसान जामुन तुड़वाने के बाद उन्हें 4-4 किलो के छोटे पैकेट में पैक करते हैं, ताकि फल खराब न हो. जामुन को पेड़ से टूटने के तुरंत बाद मंडी पहुंचाना जरूरी होता है, क्योंकि फल जितना ताजा रहेगा, उसका भाव उतना ही शानदार मिलेगा.

इसे भी पढ़ें: SPECIAL: बंजर जमीन से उगला 'सोना' तो 'एग्रो टूरिज्म' ने दिलाई खास पहचान, जानिये सुरेंद्र की रोमांचक कहानी

जामुन का शरबत, चिप्स और आइसक्रीम भी : जामुन के पल्प से जामुन का पापड़ तैयार किया जाता है. पुष्कर आने वाले विदेशी पर्यटकों को यह उत्पाद बेहद पसंद आता है. विदेशी लोग इसे 'जामुन चिप्स' (Jamun Chips) कहते हैं, जिसके बाद से इसका नाम ही जामुन चिप्स पड़ गया है. शुरुआत में यह काम बहुत छोटे स्तर पर शुरू हुआ था, लेकिन आज अकेले उनकी यूनिट में सीजन के दौरान 10,000 किलो जामुन से तरह-तरह के प्रोडक्ट्स बनाए जा रहे हैं. पुष्कर में बने इन ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स की मांग मुंबई, दमन, सूरत, अहमदाबाद, वडोदरा, चेन्नई और दिल्ली जैसे महानगरों में सालभर बनी रहती है.

पुष्कर में होता है जामुन का बंपर उत्पादन

पुष्कर में होता है जामुन का बंपर उत्पादन (फोटो ईटीवी भारत पुष्कर)

पुष्कर में भी 8 से 10 फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगी हुई है, जहां जमुना से कई उत्पाद बनाए जा रहे हैं. इनमें जामुन का शरबत, गुठली का पाउडर और चिप्स भी शामिल है. अजमेर में जामुन से बनी आइसक्रीम बनाकर बेची जा रही है. खरेखड़ी रोड स्थित वेद प्रकाश पालरिया बताते है 12 बरस पहले जामुन से जूस, चिप्स और पाउडर बनाया जाता है.

स्वाद में बेमिसाल और सेहत के लिए वरदान जामुन

स्वाद में बेमिसाल और सेहत के लिए वरदान जामुन (फोटो ईटीवी भारत पुष्कर)

कई रोगों को नियंत्रित करता है जामुन : ​चिकित्सीय दृष्टिकोण से जामुन को आयुर्वेद में महाऔषधि माना गया है. पुष्कर के राजकीय अस्पताल के पीएमओ डॉ. जी.आर. पूरी बताते हैं कि जामुन में भरपूर मात्रा में विटामिन्स और पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं. विशेष रूप से इसमें विटामिन सी और फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है, जो हमारे पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है. ​डॉ. पूरी के अनुसार, जामुन के भीतर 'जम्बोलिन' (Jambolin) नामक एक विशेष तत्व पाया जाता है. यह तत्व शरीर में ब्लड शुगर (मधुमेह) को नियंत्रित करने में अद्भुत भूमिका निभाता है. इसके अलावा, यह शरीर के बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और ब्लड प्रेशर (बीपी) को नियंत्रित रखने में मदद करता है.

इसे भी पढ़ें: मानसून में देरी से पश्चिमी राजस्थान में खरीफ की फसल पर मंडरा रहा है संकट, जल्द बारिश की आस लगाए हैं किसान

​डॉक्टर की विशेष सलाह: जामुन स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है, लेकिन इसे कभी भी खाली पेट नहीं खाना चाहिए. खाली पेट जामुन खाने से गैस्ट्रिक (गैस की समस्या) हो सकती है. इसलिए हमेशा भोजन करने के कुछ समय बाद ही जामुन का सेवन करें. ​सिर्फ जामुन का गूदा (पल्प) ही नहीं, बल्कि इसकी गुठली भी एक बेहतरीन दवा है. किसान जामुन की गुठली को सुखाकर उसके भीतर का हरा बीज निकालते हैं और उसका बारीक पाउडर तैयार करते हैं. यह पाउडर शुगर के मरीजों के लिए किसी चमत्कारिक दवा से कम नहीं है.