पीलीभीत मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में कुल 85 एचआईवी संक्रमितों में पुरुषों की संख्या महिलाओं से अधिक रही, जिससे चिंता बढ़ गई है। डॉक्टरो ...और पढ़ें
HighLights
डाॅक्टरों ने जागरुकता बढ़ाने और समय पर जांच कराने की दी सलाह
जागरण संवाददाता, पीलीभीत। एचआइवी संक्रमण को लेकर मेडिकल कालेज के सुरक्षा क्लीनिक से मिले ताजा आंकड़े पुरुषों के लिए चेतावनी हैं। 2025 में कुल 25,411 लोगों की जांच हुई, इसमें 85 लोग संक्रमित पाए गए। आंकड़ों के मुताबिक 45 पुरुष और 40 महिलाएं पाजिटिव निकलीं।
यानी पुरुषों में संक्रमण दर महिलाओं से अधिक रही। डाक्टरों ने जागरूकता बढ़ाने और समय पर जांच कराने की सलाह दी है, ताकि समय पर इलाज शुरू हो सके और संक्रमण को रोका जा सके।
मेडिकल कॉलेज के सुरक्षा क्लीनिक में एचआइवी जांच और परामर्श की मुफ्त सुविधा उपलब्ध है। 2025 के आईसीटीसी और पीपीटीसीटी के संयुक्त आंकड़ों के अनुसार बड़ी संख्या में लोग जांच के लिए पहुंचे। जांच में पाजिटिव आने वालों में पुरुषों की संख्या महिलाओं से ज्यादा रही, जो असुरक्षित व्यवहार और जागरूकता की कमी की ओर इशारा करता है।
आईसीटीसी यानी इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर पर जनरल लोगों के लिए जांच होती है। 2025 में 12,352 लोगों की काउंसलिंग हुई और सभी का एचआइवी टेस्ट हुआ। टेस्ट में 52 केस पाजिटिव मिले, इनमें 45 पुरुष और सात महिलाएं थीं।
पाजिटिविटी रेट 0.42 प्रतिशत रहा, यानी एक हजार टेस्ट पर करीब चार केस। सबसे ज्यादा 10 केस जुलाई में मिले, जबकि फरवरी, मई, अक्टूबर और नवंबर में दो-दो केस ही सामने आए। 45, 52 केस पुरुषों में मिलने से स्पष्ट है कि पुरुष वर्ग अधिक जोखिम में है।
पीपीटीसीटी यानी प्रिवेंशन आफ पैरेंट टू चाइल्ड ट्रांसमिशन के तहत गर्भवती महिलाओं की जांच शत-प्रतिशत की जा रही है। 2025 में 13,059 महिलाओं की काउंसलिंग और टेस्टिंग हुई। इसमें 11,439 गर्भवती और 1,620 सामान्य महिलाएं शामिल थीं।
जांच में 33 केस पाजिटिव मिले, इनमें आठ गर्भवती और 25 सामान्य महिलाएं थीं। पाजिटिविटी रेट 0.25 प्रतिशत रहा, यानी एक हजार टेस्ट पर करीब 2.5 केस। सबसे ज्यादा छह केस जुलाई में मिले, जबकि अगस्त और नवंबर में कोई केस नहीं मिला।
गर्भवती महिलाओं में आठ केस मिलना पीपीटीसीटी का मुख्य फोकस है ताकि मां से बच्चे में संक्रमण न जाए।एमसीएच महिला अस्पताल में इसी अवधि में 33 केस मिले, इनमें 21 पुरुष, 11 महिलाएं, चार गैर-एएनसी महिला, सात गर्भवती और 1 किशोर शामिल हैं। परुष अस्पताल में 52 केस मिले, इनमें 45 पुरुष और सात महिलाएं थीं।
लक्षण और रोकथाम
मेडिकल कालेज के उप प्राचार्य डा. अरुण सिंह ने बताया कि एचआईवी के शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार, थकान, वजन घटना, रात में पसीना, लगातार दस्त और त्वचा पर चकत्ते हो सकते हैं। कई बार पांच से 10 साल तक कोई लक्षण नहीं दिखते, इसलिए जांच ही बचाव का एकमात्र तरीका है।
रोकथाम के लिए जरूरी उपाय
- हमेशा सुरक्षित यौन संबंध बनाएं और सुरक्षा उपायों का उपयोग करें।
- सुई, सिरिंज, ब्लेड, टैटू के उपकरण कभी साझा न करें।
- रक्त लेने से पहले उसकी एचआईवी जांच सुनिश्चित करें।
- गर्भवती महिलाएं प्रसव पूर्व जांच अवश्य कराएं।
- आइसीटीसी सेंटर पर बिना झिझक मुफ्त जांच और काउंसलिंग लें।
पुरुषों में एचआइवी संक्रमण दर अधिक होना चिंता का विषय है। असुरक्षित व्यवहार और जागरूकता की कमी मुख्य कारण हैं। मेडिकल कालेज में मुफ्त जांच, परामर्श और एआरटी उपचार उपलब्ध है। समय पर जांच और नियमित दवा से एचआईवी को नियंत्रित किया जा सकता है। लोगों से अपील है कि कलंक के डर से जांच न टालें।
- डाॅ. अरुण सिंह, उप प्राचार्य, मेडिकल कालेज
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