Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS
40 की उम्र के बाद महिलाओं में हॉट फ्लैशेज और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं होना काफी आम हो जाता है। ऐसे में कुछ ठंडी तासीर वाली जड़ी बूटियों का सेवन महिलाओं के लिए फायदेमंद हो सकती हैं, जिसमें वंशलोचन, शतावरी, अशोक और लोध्र शामिल हैं।
- Written By: Katyayani Tiwari published on Jul 04, 2026 13:16 IST
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40 की उम्र पार करते ही महिलाओं के शरीर के अंदर कई तरह के बदलाव होने लगते हैं। इस उम्र में पीरियड्स बंद होने का समय पास आने लगता है, जिसके कारण महिलाओं के शरीर में हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ने लगता है। यही कारण है कि महिलाओं को अचानक बहुत तेज गर्मी और पसीना आने लगता है, जिसे मेडिकल की भाषा में हॉट फ्लैशेज कहते हैं। इसके साथ ही, बिना बात के मूड में बदलना, अचानक गुस्सा आना या उदासी आना और हर समय कमजोरी महसूस होना जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। इन सब दिक्कतों से आराम पाने के लिए आयुर्वेद में महिलाओं के लिए कुछ खास जड़ी-बूटियों के बारे में बताया गया है। आइए हरियाणा के सिरसा स्थित रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा से जानते हैं कि 40 की उम्र के बाद महिलाओं में हॉट फ्लैशेज और मूड स्विंग से राहत के लिए कौन-सी जड़ी-बूटियां लेनी चाहिए?
40 की उम्र के बाद महिलाओं के लिए जड़ी-बूटियां
आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, 40 की उम्र के बाद महिलाओं को हॉट फ्लैशेज और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं होना काफी आम है। इन समस्याओं से राहत पाने के लिए आप इन हर्ब्स को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं-
1. वंशलोचन
वंशलोचन आयुर्वेद में एक ऐसी जड़ी-बूटी है, जो बांस के पेड़ के अंदर से मिलने वाला एक नेचुरल सफेद या नीले रंग का पदार्थ है, जो देखने में छोटे कंकड़ जैसा लगता है। इसकी तासीर बहुत ठंडी होती है। 40 की उम्र के बाद यह महिलाओं के लिए एक बेहतर टॉनिक के रूप में काम करती है। इसका सेवन करने से महिलाओं में अचानक लगने वाली तेज गर्मी को शांत करने और शरीर की अंदरूनी कमजोरी को दूर करने में मदद मिलती है।
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वंशलोचन का सेवन कैसे करें?
वंशलोचन आमतौर पर छोटे-छोटे सफेद या नीले कंकड़ के रूप में होते हैं। इसे मिक्सी या इमामदस्ते में डालकर पीस लें और बारीक पाउडर बना लें। इसके बाद सुबह और शाम को आधा छोटा चम्मच या 1 से 2 ग्राम पाउडर एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर खाएं। इसके बाद हल्का गुनगुना दूध पी लें। आप चाहे तो इसे सीधे दूध में मिलाकर भी पी सकते हैं।
2. शतावरी
शतावरी को महिलाओं के लिए एक नेचुरल जड़ी बूटी मानी जाती है। 40 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में जो हार्मोनल बदलाव आते हैं, उन्हें मैनेज करने का काम करती है। यह शरीर को अंदर से ठंडा रखने का काम करती है और उम्र के असर को कम करती है। शतावरी का सेवन शरीर की कमजोरी को दूर करके ताकत बढ़ाने का काम करती है और आपकी इम्यूनिटी को मजबूत बनाती है।
शतावरी का सेवन कैसे करें?
शतावरी बाजार में कैप्सूल, पाउडर और टैबलेट के रूप में आसानी से मिल जाती है। आधा से एक छोटा चम्मच शतावरी का पाउडर लें और रात को सोने से पहले एक गिलास हल्के गुनगुने दूध के साथ मिलाकर पिएं। अगर आप पाउडर नहीं खाना चाहती हैं तो डॉक्टर की सलाह पर टैबलेट भी ले सकती हैं।
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3. अशोक
अशोक के पेड़ की छाल महिलाओं की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है। इसका सेवन महिलाओं के शरीर में हार्मोन्स के संतुलन को बिगड़ने नहीं देती है। मेनोपॉज यानी पीरियड्स बंद होने का समय के दौरान अगर पीरियड्स आगे-पीछे हो रहे हों या बहुत ज्यादा ब्लीडिंग रही हो, तो यह उसे कंट्रोल करती है।
अशोक का सेवन कैसे करें?
अशोक जड़ी बूटी को लेने का सबसे अच्छा और आसान तरीका है इसका चूर्ण या सिरप पीना। मार्केट में अशोक सिरप कई तरह के मिलते हैं, जिसे आप अपने डॉक्टर की सलाह पर ले सकते हैं। भोजन करने के बाद, अशोक चूर्ण लें और गुनगुने पानी के साथ लें। इसे सुबह और शाम दोनों समय पिएं।
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4. लोध्र
लोध्र एक ऐसी जड़ी-बूटी है, जो महिलाओं की अंदरूनी बीमारियों को ठीक करने में काफी उपयोगी माना जाता है। यह अशोक की तरह ही महिलाओं के शरीर के सिस्टम को बैलेंस करने का काम करता है। अगर 40 के बाद हैवी पीरियड्स की समस्या हो रही हो, तो यह उसे रोकने और गर्भाशय को मजबूत बनाने में मदद करती है।
लोध्र का सेवन कैसे करें?
लोध्र का इस्तेमाल ज्यादातर पाउडर के रूप में किया जाता है। आधा छोटा चम्मच लोध्र का पाउडर सुबह और शाम को खाना खाने के बाद गुनगुने पानी या शहद के साथ लेना फायदेमंद हो सकता है।
निष्कर्ष
बढ़ती उम्र में महिलाओं के शरीर में होने वाली समस्याओं को नजरअंदाज करने के स्थान पर सही आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। इन नेचुरल उपायों की मदद से महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोन्स संतुलित होते हैं, लेकिन आप इन्हें नियमित रूप से अपनी डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।
Image Credit: Freepik
FAQ
हॉट फ्लैशेस के क्या लक्षण हैं?
हॉट फ्लैशेस होने पर चेहरे, गर्दन और सीने में अचानक तेज गर्मी महसूस होती है। इसके अलावा, त्वचा का लाल या धब्बेदार होना, ज्यादा पसीना आना, दिल की धड़कन तेज होना और गर्मी कम होने पर अचानक ठंड लगने जैसे लक्षण शामिल हैं।
महिलाओं में हॉट फ्लैश क्या होता है?
महिलाओं में हॉट फ्लैश एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर के ऊपरी हिस्से में अचानक बहुत तेज गर्मी का अहसास होता है। यह मेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलावों खासकर एस्ट्रोजन के लेवल में गिरावट से जुड़ा है।
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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।
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