आज के दिन ही ईरान-इराक युद्ध के दौरान अमेरिका के सैन्य युद्धपोत ने ईरान के एक यात्री विमान को मार गिराया था. इस हादसे में 290 लोग मारे गए थे.

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यूएस नेवी ने आज के दिन ही ईरान के एक यात्री विमान को मार गिराया था (Photo - Getty)

यूएस नेवी ने आज के दिन ही ईरान के एक यात्री विमान को मार गिराया था (Photo - Getty)

3 जुलाई 19880 को फारस की खाड़ी में अमेरिकी नेवी के क्रूजर विन्सेनेस ने एक ईरानी यात्री विमान को मार गिराया. उसे उसने गलती से दुश्मन का लड़ाकू विमान समझ लिया था. अमेरिकी युद्धपोत से दो मिसाइलें दागी गईं. विमान को निशाना बनाया गया और उसमें सवार सभी 290 लोग मारे गए. यह हमला ईरान-इराक युद्ध के खत्म होने से कुछ दिनों पहले हुआ. जब अमेरिकी जहाज खाड़ी में कुवैती तेल टैंकरों की रक्षा कर रहे थे. ईरान एयर फ्लाइट 655 को मार गिराए जाने से कुछ मिनट पहले, विन्सेनेस ने ईरानी गनबोटों से मुठभेड़ की थी, जिन्होंने उसके हेलीकॉप्टर पर गोलीबारी की थी.

ईरान ने विमान गिराए जाने को बर्बर नरसंहार करार दिया, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए तब दावा किया कि विमान वाणिज्यिक जेट उड़ान गलियारे से बाहर था. केवल 7,800 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था और विन्सेनेस की ओर उतर रहा था. 

हालांकि, एक महीने बाद, अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया कि एयरबस वाणिज्यिक उड़ान गलियारे में था.12,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था और नीचे नहीं उतर रहा था. अमेरिकी नौसेना की रिपोर्ट में चालक दल की गलती का कारण उन सैनिकों पर मनोवैज्ञानिक तनाव बताया गया जो पहली बार युद्ध में शामिल हुए थे. 1996 में, अमेरिका ने हमले में मारे गए ईरानियों के परिवारों को मुआवजे के तौर पर 62 मिलियन डॉलर देने पर सहमति जताई.

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इस युद्ध में अमेरिका की नीति ईरान के खिलाफ थी. क्योंकि 1979 में ईरान में अमेरिकी नागरिकों को बंधक बनाए जाने के बाद से ही अमेरिका सहित पश्चिमी देश उससे नाराज थे. यही वजह है कि इसका फायदा इस युद्ध में इराक को मिला था  खाड़ी देश के अपने सहयोगियों की सुरक्षा की वजह से अमेरिका को फारस की खाड़ी में अपने युद्धपोत उतारने पड़े थे.  

इस घटना के बाद जुलाई में ही ईरान और इराक ने संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम को स्वीकार करने पर सहमति व्यक्त की.युद्ध औपचारिक रूप से 20 अगस्त, 1988 को समाप्त हुआ. ईरान-इराक युद्ध में हताहतों की कुल संख्या अनिश्चित है. एक अनुमान 10 लाख से 20 लाख के बीच लोग हताहत हुए. इनमें मारे गए लोगों की कुल संख्या लगभग 5 लाख तक पहुंचती है, जिसमें इराकी सेना द्वारा मारे गए हजारों कुर्द भी शामिल हैं.

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