किस्सा पुराना है, तारीख थी 26 मार्च 1991. लेकिन 34 साल बाद भी यह घटना फिर चर्चा में है. वजह है सिंगापुर के पूर्व राजदूत बिलाहारी काउसिकन का वह बयान, जिसमें उन्होंने 1991 के विमान हाईजैक का जिक्र करते हुए पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व पर तीखा हमला बोला.
मामला सिंगापुर एयरलाइंस की फ्लाइट SQ117 का था, जिसे चार पाकिस्तानी आतंकवादियों ने हाईजैक कर लिया था. विमान में 114 यात्री और 11 क्रू मेंबर सवार थे. आतंकियों ने विमान में शराब छिड़ककर उसे आग लगाने की धमकी दी थी. काउसिकन के मुताबिक, उस दौरान हाईजैकर्स बार-बार पाकिस्तान की बेनजीर भुट्टो से बात कराने की मांग कर रहे थे. यहां ये समझना जरूरी है कि साल 1991 में पाकिस्तान में नवाज शरीफ की सरकार थी. बेनजीर भुट्टो उस समय प्रधानमंत्री नहीं थीं, बल्कि देश की पूर्व पीएम होने के साथ-साथ संसद में विपक्ष की नेता थीं. यानी वो सरकार में नहीं थीं. खैर, जब सिंगापुर के अधिकारियों ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, तो जवाब मिला, "मैडम अभी सो रही हैं, उन्हें परेशान नहीं किया जा सकता."
सालों बाद इसी घटना को याद करते हुए काउसिकन ने एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर कहा कि पाकिस्तान की समस्याओं की वजह उसका भूगोल नहीं, बल्कि वहां का राजनीतिक प्रबंधन है. उन्होंने पाकिस्तान के नेताओं को वक्त की बर्बादी तक बताया.
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दरअसल, यह पूरी बहस तब छिड़ी जब एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान के एक पत्रकार ने अपनी वही पुरानी रटी-रटाई बात दोहरा दी. उनका कहना था कि पाकिस्तान की आधी से ज्यादा मुसीबतें उसके भूगोल यानी भारत और अफगानिस्तान बॉर्डर की वजह से हैं. बिलाहारी काउसिकन ने इस बहानेबाजी को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आप अपनी हर बीमारी का इलाज 'लोकेशन' को नहीं बता सकते. यह सिर्फ एक बहाना है. पाकिस्तान की तो बुनियाद ही खराब व्यवस्था पर टिकी है. वहां के नेता, चाहे वे किसी भी पार्टी के हों, समय की बर्बादी हैं और वहां की फौज इस पूरी बर्बादी की सबसे बड़ी हिस्सेदार है.
अनाड़ी हाईजैकर्स और आधी रात का वो फोन
अपनी बात को साबित करने के लिए काउसिकन 1991 की उसी घटना की परतें खोलते हैं. उनका कहना है कि कुआलालंपुर से उड़े उस विमान को जिन आतंकियों ने कब्जे में लिया था, वे बेनजीर भुट्टो की ही पार्टी (पीपीपी) के समर्थक थे. दरअसल, उस समय सिंगापुर की विदेश सेवा में तैनात काउसिकन को ही इन हाईजैकर्स से बातचीत करने का जिम्मा सौंपा गया था. वे उस दौर को याद करते हुए चुटकी लेते हैं कि वे बहुत अनाड़ी हाईजैकर्स थे, जिन्होंने विमान को ठीक उसी जगह खड़ा कर दिया, जिसे हर एयरपोर्ट ऐसे संकटों के लिए रिजर्व रखता है. यानी जहां से उन पर आसानी से नजर रखी जा सके. यही वजह थी कि सिंगापुर के अधिकारियों को आतंकियों की बाकी मांगें तो साफ समझ नहीं आ रही थीं, लेकिन वे बार-बार एक ही रट लगाए बैठे थे कि बेनजीर भुट्टो से उनकी बात कराई जाए. हालांकि, उस समय पाकिस्तान में नवाज शरीफ प्रधानमंत्री थे और बेनजीर भुट्टो सरकार में नहीं, बल्कि विपक्ष की नेता थीं, जो कि उस दौरान इस्लामाबाद से दूर सिंध में अपने पुश्तैनी घर पर रह रही थीं.
काउसिकन बताते हैं कि पाकिस्तानी हाई कमिश्नर की मदद से उन्होंने रात के करीब 3 बजे बेनजीर के घर का नंबर निकाला. टीम में किसी को उर्दू नहीं आती थी, इसलिए बड़ी मुश्किल से अंग्रेजी बोलने वाले एक शख्स से बात हो पाई.
काउसिकन ने फोन पर मौजूद उस शख्स को तीन बार तसल्ली से समझाया कि मामला कितना गंभीर है, अगर मैडम से बात नहीं हुई तो आतंकी मुसाफिरों को मारना शुरू कर देंगे. लेकिन सामने वाले के दिमाग पर वीआईपी कल्चर इस कदर हावी था कि उसने कहा, "मैडम सो रही हैं, डिस्टर्ब नहीं कर सकते" और फोन काट दिया.
जब बातचीत का हर रास्ता बंद हो गया, तो सिंगापुर के कमांडोज ने कमान संभाली. सुबह के अंधेरे का फायदा उठाकर विमान के गेट उड़ाए गए और कुछ मिनटों के भीतर चारों आतंकियों को ढेर कर दिया गया. राहत की बात रही कि तमाम मुसाफिर और क्रू मेंबर्स सुरक्षित बच गए, लेकिन बिलाहारी काउसिकन के जेहन में पाकिस्तान के बड़े लोगों का वो मिजाज हमेशा के लिए दर्ज हो गया. उनका कहना है कि यह वाकया दिखाता है कि वहां की व्यवस्था अंदर से कितनी खोखली है, जो संकट के समय एक फोन उठाने की जहमत तक नहीं उठा पाती.
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