PM Narendra Modi Seychelles Award controversy BJP vs Congress
पीएम नरेंद्र मोदी को सेशेल्स का अवॉर्ड मिलने पर बीजेपी बनाम कांग्रेस
नई दिल्ली: हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वी अफ्रीका के द्वीपों के समूह वाले देश सेशेल्स पहुंचे थे। उस दौरे में सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने पीएम मोदी को 'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' अवॉर्ड दिया। पीएम मोदी ने भी इस अवॉर्ड को स्वीकार करते हुए खुशी जताई थी। अब यह अवॉर्ड क्या मिला, विपक्षी कांग्रेस को बेहद नागवार गुजरी। यहां तक कि विदेशी मीडिया ने भी पीएम मोदी पर कांग्रेस के हवाले से निशाना साधते हुए खबरें चलाईं-'उन्हें कोई भी अवॉर्ड दीजिए, वे दौड़े चले आएंगे।' सोशल मीडिया पर कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत का इस बारे में एक वीडियो भी ट्रेंड कर रहा है, जिस पर यूजर्स पूछ रहे हैं कि क्या कांग्रेस को इससे जलन हो रही है?

बीजेपी बोली-यह अवॉर्ड पीएम मोदी की पर्यावरण की प्रतिबद्धता

द गार्जियन की एक स्टोरी के अनुसार, जब पीएम नरेंद्र मोदी सेशेल्स पहुंचे, तो हिंद महासागर में स्थित इस द्वीपीय देश ने तुरंत ही भारतीय प्रधानमंत्री को अपने 'सबसे बड़े' सम्मानों में से एक से सम्मानित किया। बीजेपी ने सोशल मीडिया एक्स पर यह अवॉर्ड सस्टेनेबल ग्रोथ और पर्यावरण की देखभाल के प्रति उनकी लगातार प्रतिबद्धता को मान्यता देता है। पार्टी ने कहा-यह उन अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की कड़ी में एक और सम्मान है जो क्लाइमेट एक्शन, ग्रीन ग्रोथ और सस्टेनेबल डेवलपमेंट में उनके योगदान को मान्यता देते हैं।

अवॉर्ड में सेशेल्स की स्पेलिंग में गलती पर हंगामा

वहीं, इस अवॉर्ड के मिलने के बाद कई आलोचकों ने दावा किया कि जानकारों ने जल्द ही बताया कि इस अवॉर्ड में कई बातें अजीब थीं। सर्टिफिकेट में 'republic' की स्पेलिंग गलत लिखकर 'repubblic' कर दी गई थी, और यहां तक कि 'Seychelles' की स्पेलिंग भी गलत लिखकर 'Seycheeles' कर दी गई थी। पता चला कि यह अवॉर्ड मोदी के आने से महज तीन दिन पहले ही बनाया गया था और वे इसे पाने वाले पहले और एकमात्र व्यक्ति थे। कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत ने भी सोशल मीडिया एक्स पर पीएम मोदी की आलोचना कर डाली।

भक्त निहाल हैं कि मोदी जी को अवार्ड मिल रहा है। वो बेचारे क्या जानें कि विदेशी मोदी जी की कमजोरी समझ चुके हैं। बस अवार्ड देकर मूर्ख बनाओ। Seychelles के दौरे के दौरान भारत ने 175 मिलियन डॉलर (लगभग 1500 करोड़ रूपये) की आर्थिक मदद देने का फैसला किया है। 125 मिलियन डॉलर लाइन ऑफ क्रेडिट और 50 मिलियन डॉलर की ग्रांट है जो वापस नहीं होगी। भक्त ताली थाली बजा सकते हैं!

सुप्रिया श्रीनेत, कांग्रेस



पीएम मोदी को अवॉर्ड मिलते ही कांग्रेस ने कर दी आलोचना

मामले को और गरमाते हुए जब सर्टिफिकेट को सॉफ्टवेयर से जांचा गया, तो बड़े पैमाने पर यह बात सामने आई कि इसे AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बनाया गया था। विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने तुरंत इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा-'उन्हें कोई भी अवॉर्ड दे दो, वे तुरंत चले आएंगे।' कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा, 'वे इतनी जल्दबाजी में थे कि उन्होंने सेशेल्स गणराज्य का आधिकारिक नाम भी गलत लिख दिया।'

सोशल मीडिया पर बीजेपी जेनजी ने कांग्रेस से पूछा क्या अवॉर्ड से जल गए?

सोशल मीडया इंस्टाग्राम पर बीजेपी जेनजी नाम के हैंडल पर सुप्रिया श्रीनेत का एक वीडियो शेयर करते हुए पूछा गया-क्या अवॉर्ड से जल गए? हर ग्लोबल सम्मान से बहस खत्म नहीं होती... कभी-कभी इससे कहीं बड़ी बहस शुरू हो जाती है। इसमें कहा गया है-कांग्रेस नेताओं ने इस सम्मान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने आधिकारिक प्रमाण-पत्र में वर्तनी की गलतियों की ओर इशारा किया और आरोप लगाया कि यह सम्मान विशेष रूप से मोदी के लिए ही बनाया गया था। उन्होंने यात्रा के दौरान सेशेल्स को दी गई भारत की वित्तीय सहायता, अनुदान और 'लाइन ऑफ क्रेडिट' पर भी चिंता जताई और पूछा कि क्या यह सम्मान भारत की वित्तीय प्रतिबद्धताओं से जुड़ा था।

बीजेपी जेनजी ने कहा-आलोचना यहीं नहीं रुकी। टीएमसी नेताओं ने सोशल मीडिया पर इस सम्मान का मजाक उड़ाया और कहा कि इस सम्मान के समय और भारत द्वारा घोषित समर्थन की बारीकी से जांच होनी चाहिए।
बीजेपी ने इन आरोपों को बेबुनियाद राजनीतिक हमला बताते हुए कड़ा जवाब दिया। बीजेपी नेताओं के अनुसार, विपक्ष भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रहा था और एक संप्रभु राष्ट्र द्वारा दिए गए अंतरराष्ट्रीय सम्मान का अनादर कर रहा था।

सेशेल्स के साथ भारत का जुड़ाव हिंद महासागर में दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय कूटनीति को दर्शाता है, न कि किसी लेन-देन वाले सौदे को।

बीजेपी


सेशेल्स ने भी टाइपो पर जताया खेद

सेशेल्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए गए 'प्रेसिडेंशियल डिस्टिंक्शन' सम्मान के लिए जारी साइटेशन (प्रशस्ति-पत्र) के एक वर्ज़न में हुई टाइपिंग की गलतियों पर खेद जताया है। सेशेल्स ने कहा है कि ऑनलाइन सर्कुलेट हुआ डॉक्यूमेंट असल में एक ड्राफ्ट था, जिसे सार्वजनिक रूप से जारी करने का इरादा नहीं था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेशेल्स के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सर्कुलेट हुए वर्ज़न में स्पेलिंग और फॉर्मेटिंग की गलतियां थीं, जिनमें ऑफिशियल सील पर हुई गलती भी शामिल है।

प्रशस्ति-पत्र में टाइपिंग और स्पेलिंग की गलतियां हैं, जिनमें सील पर हुई गलती भी शामिल है। मंत्रालय इसे मानता है और इस पर खेद जताता है।

सेशेल्स विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय ने भी दे डाली सफाई

इस पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि उनके लिए 'ग्रीन लीडरशिप' (पर्यावरण के प्रति नेतृत्व) के लिए यह अवॉर्ड मिलना भारत के लिए गर्व का क्षण' है। बीते गुरुवार को सेशेल्स के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि गलती से एक 'वर्किंग ड्राफ्ट' जारी हो गया था और अब 'असली और विधिवत स्वीकृत' संस्करण जारी कर दिया गया है। आलोचकों ने बताया है कि सत्ता में अपने 12 सालों के दौरान मोदी ने देश और विदेश में अवॉर्ड पाने में काफी दिलचस्पी दिखाई है।

गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन सम्मान असली है।

भारतीय विदेश मंत्रालय

मोदी को पहले भी धड़ाधड़ मिले अवॉर्ड

  • रिपोर्टों के अनुसार, पिछले महीने पीएम मोदी के इजरायल दौरे से कुछ दिन पहले इजरायली संसद ने जल्दबाजी में देश के सबसे बड़े सम्मानों में से एक माना जाने वाला 'मेडल ऑफ द नेसेट' बनाया और मोदी के वहां पहुंचते ही उन्हें यह सम्मान दिया गया। अब तक यह सम्मान पाने वाले वे अकेले व्यक्ति हैं।
  • 2019 में मोदी भारत का 'फिलिप कोटलर प्रेसिडेंशियल अवॉर्ड' पाने वाले पहले व्यक्ति भी बने। यह अवॉर्ड प्रधानमंत्री को 'देश के बेहतरीन नेतृत्व' के लिए दिया गया था। सरकार की प्रेस रिलीज के मुताबिक, यह सम्मान हर साल किसी देश के नेता को दिया जाना था। हालांकि, उसके बाद से किसी और नेता को यह अवॉर्ड नहीं दिया गया है और इसकी वेबसाइट भी अब निष्क्रिय पड़ी है।
  • गार्जियन की एक रिपोर्ट में कहा गया है-यह बात दबी ज़ुबान से मानी जाती है कि मोदी के विदेशी दौरों के दौरान सम्मान और पुरस्कार मिलना अब एक उम्मीद बन गई है।
  • पिछले साल मोदी इथियोपिया का 'ग्रेट ऑनर निशान' और 'ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो' पाने वाले पहले विदेशी राष्ट्राध्यक्ष भी बने। बीजेपी का कहना है कि ये पुरस्कार मोदी के अंतरराष्ट्रीय कद की पहचान हैं।

दिनेश मिश्र

लेखक के बारे मेंदिनेश मिश्रदिनेश मिश्र, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। वे अप्रैल-2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। दिनेश मिश्र NBT डिजिटल में एक्सप्लेनर और स्पेशल स्टोरीज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ये एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस और एंटरटेनमेंट समेत किसी भी कैटेगरी की खबरों से जुडे होते हैं, जिसमें दिनेश मिश्र रणनीतिक रूप से डीप डाइव, रिसर्च, वैल्यु एड, एक्सपर्ट कमेंट्स जैसी जरूरी बातें शामिल होती हैं। इन एक्सप्लेनर को लेकर वीडियो भी करते हैं। साथ ही NBT डिजिटल के स्थायी कॉलम मंडे मोटिवेशन, ट्यूजडे ट्रीविया और वेडनेसडे बिग टिकट के लिए डीप डाइव रोचक स्टोरी भी लिखते हैं। वह हर एक्सप्लेनर स्टोरी में सटीक संपादन के साथ-साथ रियल टाइम का ध्यान रखते हैं। इसके अलावा, वे गूगल ट्रेंड से जुड़ी स्टोरीज भी करते आए हैं, जो अहम टास्क है। दिनेश मिश्र ने प्रयागराज महाकुंभ की ग्राउंड कवरेज की है। साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान खबरों को डेस्क और ग्राउंड दोनों से कवर किया है। 2025 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ स्टेट असेंबली इलेक्शंस (हालिया महाराष्ट्र और बिहार चुनाव) के दौरान भी डेस्क से ओपिनियन पीस लिखने के साथ-साथ रियल टाइम एक्सप्लेनर भी किए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के खिलाफ एनबीटी फैक्ट चेक भी करते रहे हैं। दिनेश मिश्र अपने करीब 16 साल के कॅरियर के दौरान प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग और इंटरव्यू करने के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते आए हैं। हिंदी और गीत-संगीत में दखल रखने वाले दिनेश मिश्र ने कई किताबों की समीक्षा भी की। दिनेश मिश्र ने जाने-माने गीतकार गुलजार और गोपालदास नीरज का इंटरव्यू किया, हिंदी के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के अनुभवों को लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की। दिनेश मिश्र ने शोले के निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी का इंटरव्यू भी किया। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का इमरजेंसी के अनुभव पर इंटरव्यू किए और 1996 से लेकर 2001 तक अमेरिका में भारत के राजदूत रहे नरेश चंद्रा का भी इंटरव्यू किया है। इसके अलावा, हिंदी के बड़े लेखक गिरिराज किशोर और विश्वनाथ त्रिपाठी का इंटरव्यू भी किए। नेशनल-इंटरनेशनल, बिजनेस और एंटरटेनमेंट की खबरों को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर नजर रहती है। पहली प्राथमिकता है किसी भी खबर की सच्चाई के साथ विश्लेषण करना। इसके बाद उसका असर कहां और कितना पड़ेगा, इसे लेकर भी अवेयर रहते हैं। पत्रकारिता का अनुभव दिनेश मिश्र का पत्रकारिता का कॅरियर हिंदी के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार दैनिक जागरण, नोएडा के सेंट्रल डेस्क के साथ साल 2010 में शुरू हुआ। इसके बाद से यह सफर 2013 में अमर उजाला, नोएडा से होता हुआ 2016 में राजस्थान पत्रिका के नेशनल इंटीग्रेटेड कंटेंट स्टेशन, नोएडा तक पहुंचा, जहां अखबार के साथ-साथ डिजिटल, टीवी और तीनों ही प्लेटफॉर्म पर एकसाथ काम किए। इसके बाद दिनेश मिश्र ने फिर 2019 में अमर उजाला में लौटे, जहां से 2021 में दैनिक भास्कर के डीबी डिजिटल में काम किया और एक्सप्लेनर और डीप डाइव-रिसर्च और स्पेशल स्टोरीज की बारीकियां सीखीं। इसके बाद अप्रैल, 2024 में दिनेश मिश्र देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह टाइम्स ऑफ इंडिया के नवभारत टाइम्स से जुड़े। दिनेश मिश्र ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, हरियाणा से पत्रकारिता से एमए किया। उससे पहले महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उससे भी पहले वो समाज शास्त्र से भी एमए कर चुके हैं। दिनेश मिश्र ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा भी दी है और उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की कई परीक्षाएं भी दीं। इसके अलावा, मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एमपावरमेंट के एक रिसर्च प्रोग्राम 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स इन जेरियाट्रिक केयर भी किया है।... और पढ़ें