नासा के जेम्स वेब टेलीस्कोप ने M82 Cigar Galaxy में धूल के पार झांककर 1.65 करोड़ तारों को अलग-अलग पहचाना है.

मिल्की वे से दस गुना तेज़ी से तारे बनाने वाली एम82 गैलेक्सी की असमान डिस्क किसी पुराने गैलेक्सी टकराव का इशारा कर रही है.
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Image Credit: NASA, ESA, CSA, Adam Smercina (STScI, Tufts), Thomas Williams (University of Manchester); Image Processing: Alyssa Pagan (STScI)
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Published : June 30, 2026 at 3:28 PM IST
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हैदराबाद: पृथ्वी से करीब 1.2 करोड़ लाइट-ईयर्स दूर एक गैलेक्सी है, जिसे M82 गैलेक्सी या सिगार गैलेक्सी भी कहा जाता है. इस गैलेक्सी को अंतरिक्ष की सबसे तेज स्टार-फैक्ट्री भी माना जाता है. नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने अब इस गैलेक्सी पर 65 घंटे की गहराई से नज़र डालकर वहां मौजूद करीब 1.65 करोड़ तारों को अलग-अलग पहचान लिया है.
हालांकि, वैज्ञानिक साफ कहते हैं कि यह आंकड़ा गैलेक्सी की पूरी आबादी नहीं है, बल्कि सिर्फ उतने तारों का है, जिन्हें टेलीस्कोप अलग से देख पाया. इनके अलावा यानी 1.65 करोड़ तारों के अलावा भी बहुत सारे बहुत धुंधले होने की वजह से नज़र नहीं आते.
कैसे की गई खोज?
M82 Galaxy को इससे पहले हबल और हबल और स्पिट्जर टेलीस्कोप भी देख चुके हैं, लेकिन गैलेक्सी के भीतर मौजूद घनी धूल हमेशा रुकावट बनती रही थी. वेब टेलीस्कोप इन्फ्रारेड लाइट में काम करता है, जो धूल के बीच से आसानी से गुज़र जाती है. इसके निकर- कैम इंस्ट्रूमेंट ने लंबे एक्सपोज़र के जरिए गैलेक्सी की डिस्क को चीरते हुए लाखों तारों को अलग-अलग बिंदुओं में बदल दिया.
यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के बेंजामिन विलियम्स के मुताबिक, इतनी बड़ी संख्या में तारों को अलग करके देख पाना पहले कभी मुमकिन नहीं था और ये तारे मिलकर एम82 के बनने और बदलने की पूरी कहानी बताते हैं.
यह गैलेक्सी मिल्की वे गैलेक्सी की तुलना में करीब दस गुना तेज़ी से नए तारे बना रही है, लेकिन यह रफ्तार ज्यादा दिन टिकने वाली नहीं है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह एक्टिव दौर सिर्फ कुछ सौ करोड़ साल नहीं बल्कि कुछ सौ मिलियन साल तक ही चलेगा, क्योंकि बड़े तारों के सुपरनोवा बनने से गैस तेज़ी से बाहर फेंकी जा रही है.
असमान आकार और टकराव का इशारा
वेब की तस्वीर में गैलेक्सी की डिस्क एक तरफ ज्यादा फैली और दूसरी तरफ कम.खगोलविदों का मानना है कि यह बनावट किसी पड़ोसी गैलेक्सी के साथ हुए करीबी टकराव या विलय का नतीजा हो सकता है, जिसने गैस को गैलेक्सी के केंद्र की ओर धकेल दिया और स्टार-फॉर्मेशन को भड़का दिया. स्पेस टेलीस्कोप साइंस इंस्टीट्यूट के एडम स्मरसिना के अनुसार M82 एक खूबसूरत लेकिन उलझा हुआ सिस्टम है, जिसकी पूरी डेवलपमेंट अभी भी एक रहस्य ही बनी हुई है.
गैलेक्सी के ऊपर और नीचे की ओर निकलते हुए दो बड़े प्लूम भी इसी हलचल का सबूत हैं, जिनमें डिस्क के पास आयनाइज़्ड गैस और उससे दूर धूल के महीन कण मौजूद हैं. टीम सदस्य क्रिस्टन मैकक्विन के मुताबिक, किसी एक मिशन से पूरी तस्वीर नहीं मिलती, इसलिए वेब और हबल के डेटा को साथ जोड़कर ही गैलेक्सी के अतीत और भविष्य को समझने की कोशिश जारी है.
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