
ट्रेलर में मानवाधिकार की लड़ाई लड़ने वाले कार्यकर्ता जसवंत सिंह हैं और इस भूमिका को दिलजीत दोसांझ ने केवल निभाया नहीं बल्कि जी लिया है। अपने मूल में, 'सतलज' यह सशक्त संदेश देती है कि सबसे बड़ा साहस अक्सर वही होता है, जो उन व्यवस्थाओं को चुनौती देने का हौसला रखता है, जो सच को हमेशा के लिए दफन कर देना चाहते हैं।
यह फिल्म हजारों रहस्यमय गुमशुदगियों की भयावह सच्चाई बताती है
जसवंत सिंह के जीवन से प्रेरित 'सतलज' एक ऐसे व्यक्ति की सच्चाई की अडिग खोज है, जो भय, सत्ता और खामोशी के बीच भी न्याय की लड़ाई से पीछे नहीं हटता। संघर्ष और अशांति के बैकग्राउंड पर आधारित यह फिल्म हजारों रहस्यमय गुमशुदगियों की भयावह सच्चाई और अपने प्रियजनों के लिए न्याय की तलाश में भटकते परिवारों की असहनीय पीड़ा को संवेदनशीलता के साथ सामने लाती है।जहां एक आम आदमी ने एक असाधारण सिस्टम के खिलाफ खड़े होने का फैसला किया
यह कहानी उस समय के बैकग्राउंड पर बनी है, जो उग्रवाद, राजनीतिक हिंसा और भय से प्रभावित था, जहां हजारों लोग बिना किसी कारण के लापता हो गए और न्याय मिलना मुश्किल था। वहां एक आम आदमी ने एक असाधारण सिस्टम के खिलाफ खड़े होने का फैसला किया।यह सत्ता, जवाबदेही और उन नैतिक उलझनों की गहन पड़ताल है
इस अटूट विश्वास से प्रेरित होकर कि हर लापता व्यक्ति का हिसाब मिलना चाहिए, जसवंत सिंह ने ऐसी लड़ाई लड़ी जिसे बहुत कम लोग लड़ने का साहस कर सके। 25,000 से अधिक लापता लोगों के लिए न्याय की उनकी दशकों लंबी खोज ने उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया और उनके साहस, त्याग और धैर्य की सीमाओं की कठोर परीक्षा ली। सतलज केवल एक व्यक्ति के संघर्ष की कहानी नहीं है, बल्कि यह सत्ता, जवाबदेही और उन नैतिक उलझनों की गहन पड़ताल है जो तब सामने आती हैं जब कोई राष्ट्र शांति के नाम पर युद्ध करता है। यह वो शक्तिशाली जड़ है जहां सच को चाहे कितना भी दबा दिया जाए, उसे कभी मिटाया नहीं जा सकता।टाइटल: सतलज
प्लेटफॉर्म: हिंदी Zee 5
भाषा: हिंदी
शैली: सामाजिक ड्रामा
रिलीज़ की तारीख: 3 जुलाई 2026
निर्देशक एवं लेखक: हनी त्रेहान
निर्माता: रॉनी स्क्रूवाला, हनी त्रेहान, अभिषेक चौबे
कलाकार: दिलजीत दोसांझ, अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की, गीतिका विद्या ओहल्यान सहित अन्य
इसमें त्याग, चुप्पी और कभी न भरने वाला घाव है
'सतलज' अच्छाई और बुराई की कहानी नहीं है। इसमें त्याग, चुप्पी और कभी न भरने वाला घाव है, जहां कोई दिखावा नहीं, कोई शोर नहीं। सिर्फ लोग। सतलज इंसानी कहानी को सबसे आगे रखती है क्योंकि हर नुकसान महसूस होना चाहिए, हर जोखिम याद रहना चाहिए और हर उम्मीद को अर्जित करना चाहिए। इस ट्रेलर में दिलजीत दोसांझ और अर्जुन रामपाल अपने दमदार अभिनय से सबका दिल जीत रहे हैं। आखिरी कुछ झलकियों में दिलजीत को पहचान पाना भी मुश्किल है।
लेखक के बारे मेंअर्चना सिंहअर्चना सिंह नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर हैं। पत्रकारिता की दुनिया में उनका सफर मुंबई से शुरू हुआ, जहां उन्होंने नवभारत टाइम्स अखबार के बाद न्यूज18 के साथ काम किया। साल 2008 से वह दिल्ली में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़ी हुई हैं। अपने करियर के दौरान उन्हें विविध भारती के साथ भी काम करने का अवसर मिला, जिसने उनके अनुभवों को तराशा। पत्रकारिता के सफर में उन्होंने क्राइम बीट से लेकर बीएमसी और लोकल न्यूज़ रिपोर्टिंग की जिम्मेदारियां संभालीं। इसके साथ ही फिल्मी पार्टियों, इवेंट्स और फिल्मी कलाकारों के इंटरव्यूज़ कवर किए। मुंबई में आयोजित काला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल, सेंट जेवियर्स कॉलेज का 'मल्हार फेस्टिवल' जैसे इवेंट्स की रिपोर्टिंग भी इनके अनुभव का हिस्सा रही हैं। मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दोषी अबू सलेम को जब भारत लाया गया था, उस अहम घटना पर रिपोर्टिंग करने का मौका भी इन्हें मिला। विशेषज्ञता : नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में रहते हुए अर्चना सिंह ने एंटरटेनमेंट, न्यूज़, बिजनेस और लाइफस्टाइल जैसे कई अहम बीट्स पर काम किया। उन्हें रिसर्च आधारित फिल्मी खबरें, फीचर स्टोरीज और फिल्म या टेलिविजन से जुड़े मुद्दों पर ओपिनियन और एनालिसिस आर्टिकल लिखना खास तौर पर पसंद है। हॉलीवुड और बॉलीवुड की खबरें, एक्सप्लेनर स्टोरीज, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, फिल्मों और वेब सीरीज के रिव्यू, गॉसिप्स, फीचर कंटेंट, इंटरव्यू और टेलिविजन शोज को फैक्ट-चेक के साथ कवर करने में उनकी अच्छी पकड़ है। पत्रकारिता का अनुभव: करीब 20 साल के पत्रकारिता अनुभव के साथ, इन्होंने अपने करियर के 18 साल नवभारत टाइम्स ऑनलाइन को दिए हैं। इस दौरान ये संस्थान के एंटरटेनमेंट डेस्क का अहम हिस्सा रहीं। इनके काम के लिए इन्हें संस्थान की ओर से ‘अचीवर्स ऑफ क्रेडिबल एक्सलेंस ग्रैंड सल्यूट अवॉर्ड’ सहित कई बार बेस्ट परफॉर्मर अवॉर्ड दिया जा चुका है। अर्चना सिंह ने मुंबई के सोमैया कॉलेज से साइंस विद्याविहार से ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद इन्होंने केसी कॉलेज ऑफ आर्ट्स, मुंबई से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया।... और पढ़ें





